जनादेश पर भारी ‘पॉलिटिकल पावर’: खंडित निकायों में भाजपा ने पलटा सत्ता का गणित

अजमेर संभाग की 1,694 सीटों और 52 निकाय प्रमुखों का पूरा विश्लेषण; 26 त्रिशंकु निकायों में निर्दलीय बने सत्ता की चाबी

अजमेर संभाग के निकाय चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा। 52 में से 36 निकायों में भाजपा ने अपने प्रमुख बनाए हैं, जबकि कांग्रेस 14 पर सिमट गई। अजमेर में 37 पार्षदों के बावजूद कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और 32 पार्षदों वाली भाजपा ने अपना महापौर बना लिया। किशनगढ़, डीडवाना और कुचामन में भी पार्षदों का गणित बदल गया है।


धर्मेंद्र प्रजापति | लोक बात

अजमेर संभाग के नगर निकाय चुनाव में की तस्वीर बताती है कि भाजपा ने न केवल पार्षद सीटों में बढ़त बनाई, बल्कि निर्दलीयों के समर्थन और बेहतर चुनावी प्रबंधन के बल पर निकाय प्रमुखों के चुनाव में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया। अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, नागौर और टोंक जिलों के कुल 52 निकायों में भाजपा के 36 महापौर, सभापति अथवा अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस 14 निकाय प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर सकी। नागौर जिले की मारवाड़-मूंडवा नगरपालिका में आरएलपी और रियांबड़ी नगरपालिका में निर्दलीय प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद जीता। वार्ड चुनाव में जिन 26 निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, उनमें निर्दलीय पार्षदों और छोटे दलों ने निर्णायक भूमिका निभाई। अध्यक्षीय चुनाव के बाद यह भी साफ हो गया कि इस खंडित जनादेश का सबसे अधिक राजनीतिक लाभ भाजपा ने उठाया।


संभाग का अंतिम सत्ता-समीकरण

जिलाकुल निकायभाजपा के प्रमुखकांग्रेस के प्रमुखअन्य
अजमेर9810
ब्यावर5500
भीलवाड़ा11830
डीडवाना-कुचामन8350
नागौर9432
टोंक10820
अजमेर संभाग5236142

अन्य में आरएलपी और निर्दलीय के एक-एक निकाय प्रमुख शामिल हैं।


पार्षद चुनाव में भाजपा 740, कांग्रेस 589 सीटों पर

संभाग के 52 शहरी निकायों में कुल 1,695 वार्ड निर्धारित थे, लेकिन टोंक नगर परिषद के वार्ड संख्या 2 में कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं होने के कारण 1,694 वार्डों के परिणाम घोषित हुए।
भाजपा ने 740 पार्षद सीटें जीतकर पहला स्थान प्राप्त किया। कांग्रेस को 589, निर्दलीयों को 321 और आरएलपी सहित अन्य दलों को 44 सीटें मिलीं। भाजपा कांग्रेस से 151 सीट आगे रही। यह बढ़त मुख्य रूप से नगरपालिकाओं और छोटे कस्बों में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन से बनी।

क्षेत्रनिकायघोषित सीटेंभाजपाकांग्रेसनिर्दलीयअन्य
अजमेर जिला9315160120332
ब्यावर जिला51709149228
भीलवाड़ा जिला11325156102661
डीडवाना-कुचामन828581105945
नागौर जिला9285961016028
टोंक जिला10314156112460
अजमेर संभाग52169474058932144

26 त्रिशंकु निकायों में भाजपा का चुनावी प्रबंधन भारी

वार्ड परिणामों में भाजपा को 18 और कांग्रेस को 7 निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला था। मकराना में 36 निर्दलीय पार्षद जीते थे। शेष 26 निकायों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। लेकिन निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा ने 36 पद जीत लिए। इसका अर्थ है कि पार्टी ने अपने स्पष्ट बहुमत वाले निकायों के अतिरिक्त 18 और निकायों में निर्दलीयों, छोटे दलों अथवा दूसरे खेमे से मिले समर्थन के सहारे सत्ता हासिल की। कांग्रेस के पास सात निकायों में स्पष्ट बहुमत था, जबकि उसके 14 निकाय प्रमुख बने। उसने सात अतिरिक्त निकायों में समर्थन जुटाया, लेकिन खंडित जनादेश को सत्ता में बदलने की दौड़ में भाजपा उससे काफी आगे रही।

अजमेर में बड़ा उलटफेर: 37 पार्षद कांग्रेस के, महापौर भाजपा की

अजमेर नगर निगम का परिणाम पूरे संभाग के अध्यक्षीय चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर रहा। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत के 41 के आंकड़े से चार सीट पीछे थी। भाजपा को महापौर बनाने के लिए नौ अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी। महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को 37 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा ने अपने निर्वाचित पार्षदों की संख्या से 11 वोट अधिक हासिल कर छह मतों से महापौर पद जीत लिया। कांग्रेस को उतने ही वोट मिले, जितने उसके पार्षद थे। परिणाम का सीधा राजनीतिक संकेत है कि निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भाजपा के पक्ष में गया। इस जीत के साथ भाजपा ने अजमेर नगर निगम में अपना बोर्ड बचा लिया, जबकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सत्ता से बाहर रह गई।
यह परिणाम केवल महापौर पद की हार-जीत नहीं, बल्कि कांग्रेस के राजनीतिक और रणनीतिक प्रबंधन की बड़ी विफलता है। जनता ने भाजपा से अधिक पार्षद कांग्रेस को दिए, लेकिन कांग्रेस उस जनादेश को सत्ता में परिवर्तित नहीं कर सकी। दूसरी ओर भाजपा ने संख्या में पीछे रहने के बावजूद निर्दलीयों को अपने पक्ष में जोड़कर महापौर बना लिया।


सवाल —अजमेर का मेयर जनता के जनादेश से बना या राजनीतिक प्रबंधन से ?

अब परिणाम सामने है। 37 पार्षदों वाली कांग्रेस सत्ता से बाहर है और 32 पार्षदों वाली भाजपा ने महापौर बना लिया। हालांकि किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त का कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है, इसलिए किसी दल अथवा पार्षद पर ऐसा आरोप नहीं लगाया जा सकता। लेकिन निर्दलीय पार्षदों का एकतरफा समर्थन किन राजनीतिक अथवा विकास संबंधी शर्तों पर मिला, इसे सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।

अजमेर जिले में नौ में आठ निकायों पर भाजपा

अजमेर जिले में भाजपा ने अध्यक्षीय चुनाव में एकतरफा बढ़त बनाई। जिले के नौ निकायों में से आठ में भाजपा और केवल केकड़ी में कांग्रेस का निकाय प्रमुख बना।

  • अजमेर नगर निगम — अनामिका शर्मा, भाजपा
  • किशनगढ़ नगर परिषद — राजकुमार, भाजपा
  • पुष्कर नगर परिषद — राजेंद्र बाकोलिया, भाजपा; निर्विरोध
  • केकड़ी नगरपालिका — अनिल कुमार मित्तल, कांग्रेस
  • नसीराबाद नगरपालिका — सुखदेव, भाजपा
  • पीसांगन नगरपालिका — लोकेश, भाजपा
  • सरवाड़ नगरपालिका — मनोज सैनी, भाजपा
  • सावर नगरपालिका — पद्मिनी, भाजपा
  • टांटोटी नगरपालिका — टीकम, भाजपा

किशनगढ़ में भाजपा के केवल 29 पार्षद थे और बहुमत के लिए 31 वोट चाहिए थे, लेकिन भाजपा के राजकुमार ने 41 वोट हासिल किए। नसीराबाद में भाजपा और कांग्रेस के नौ-नौ पार्षद थे; भाजपा के सुखदेव 11 वोट लेकर अध्यक्ष बने। पीसांगन में भाजपा के नौ पार्षद होने के बावजूद लोकेश को 16 वोट मिले। केकड़ी में कांग्रेस के अनिल कुमार मित्तल ने 21 वोट लेकर अध्यक्ष पद जीता। यहां कांग्रेस के 20, भाजपा के 18 और आरएलपी के दो पार्षद थे।


ब्यावर जिले में भाजपा का क्लीन स्वीप

ब्यावर जिले के सभी पांच निकाय प्रमुख पद भाजपा के खाते में गए।

  • ब्यावर नगर परिषद — पुष्पा बल्दुआ
  • बिजयनगर नगरपालिका — ममता
  • जैतारण नगरपालिका — भेणाराम गहलोत
  • मसूदा नगरपालिका — टीकम चंद माली
  • रायपुर नगरपालिका — मदन लाल; निर्विरोध

ब्यावर नगर परिषद में भाजपा के 23 पार्षद थे और बहुमत के लिए 31 वोट चाहिए थे। इसके बावजूद भाजपा की पुष्पा बल्दुआ सभापति बनीं। यहां 13 निर्दलीय और आरएलपी के चार पार्षदों की भूमिका निर्णायक रही।


भीलवाड़ा में भाजपा को आठ, कांग्रेस को तीन निकाय

भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा के पास 45 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत था। भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी गईं।
जिले में भाजपा ने भीलवाड़ा निगम के अलावा आसींद, बनेड़ा, बीगोद, बिजौलिया, गुलाबपुरा, जहाजपुर और मांडलगढ़ में सत्ता हासिल की। कांग्रेस ने गंगापुर, हमीरगढ़ और शाहपुरा नगरपालिका अध्यक्ष पद जीते।

  • भीलवाड़ा निगम — जसवंत कंवर, भाजपा; निर्विरोध
  • आसींद — सत्येंद्रसिंह चौहान, भाजपा
  • बनेड़ा — गोपालचरण, भाजपा
  • बीगोद — लोकेश कुमार नागौरी, भाजपा
  • बिजौलिया — स्नेहा तिवाड़ी, भाजपा
  • गंगापुर — प्रीति काकानी, कांग्रेस
  • गुलाबपुरा — विष्णु देवी वैष्णव, भाजपा
  • हमीरगढ़ — प्रकाश जाट, कांग्रेस
  • जहाजपुर — अलकेश, भाजपा
  • मांडलगढ़ — श्वेता देवी डांगी, भाजपा
  • शाहपुरा — रमेश कुमार सेन, कांग्रेस

डीडवाना-कुचामन में कांग्रेस को बढ़त, लेकिन दो परिषद भाजपा ने छीनीं

डीडवाना-कुचामन जिला संभाग का एकमात्र ऐसा बड़ा क्षेत्र रहा, जहां कांग्रेस ने आठ में से पांच निकाय प्रमुख पद हासिल किए। भाजपा को तीन पद मिले। डीडवाना नगर परिषद में कांग्रेस के 16 और भाजपा के केवल नौ पार्षद थे, लेकिन भाजपा के भंवरलाल पंवार सभापति चुने गए। कुचामन सिटी में भी कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन सभापति भाजपा के महेश बने। मकराना में 36 निर्दलीय पार्षद जीतकर सबसे बड़ा समूह बने थे, लेकिन सभापति पद कांग्रेस के रियाज अहमद ने हासिल किया। यह निर्दलीयों के निर्णायक समर्थन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

  • डीडवाना — भंवरलाल पंवार, भाजपा
  • कुचामन सिटी — महेश, भाजपा
  • मकराना — रियाज अहमद, कांग्रेस
  • बोरावड़ — मनफूल, कांग्रेस
  • खाटू खुर्द — राजूराम, कांग्रेस
  • लाडनूं — परवीन, कांग्रेस
  • नावां — कविता कुमारी, कांग्रेस
  • परबतसर — श्री भगवान बंग, भाजपा

नागौर में बहुकोणीय राजनीति कायम

नागौर जिले के नौ निकायों में भाजपा के चार, कांग्रेस के तीन, आरएलपी के एक और निर्दलीय के एक प्रमुख निर्वाचित हुए। नागौर नगर परिषद में 23 निर्दलीय पार्षद सबसे बड़ा समूह थे, लेकिन सभापति पद भाजपा की संतोष ने जीता। मारवाड़-मूंडवा में आरएलपी की अलका और रियांबड़ी में निर्दलीय सुनील कुमार चौहान अध्यक्ष बने।

  • नागौर नगर परिषद — संतोष, भाजपा
  • बासनी — शौकत अली, कांग्रेस
  • डेगाना — राधाकिशन, भाजपा
  • जायल — कमलेश, कांग्रेस
  • कुचेरा — तेजपाल, कांग्रेस
  • मारवाड़-मूंडवा — अलका, आरएलपी
  • मेड़ता सिटी — कंचनदेवी सांखला, भाजपा
  • मेड़ता रोड — तुलसी देवी, भाजपा
  • रियांबड़ी — सुनीलकुमार चौहान, निर्दलीय

यह परिणाम बताता है कि नागौर की राजनीति भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं है। यहां क्षेत्रीय दल और स्थानीय चेहरे अब भी सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।


टोंक शहर कांग्रेस का, जिले के आठ निकाय भाजपा के

टोंक जिले के दस निकायों में भाजपा ने आठ और कांग्रेस ने दो निकाय प्रमुख पद जीते। टोंक नगर परिषद में कांग्रेस के पास 32 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत था। कांग्रेस के मयंक गोयल सभापति चुने गए। उनियारा में भी कांग्रेस ने अपना अध्यक्ष बनाया। शेष आठ निकाय भाजपा के खाते में गए।

  • टोंक नगर परिषद — मयंक गोयल, कांग्रेस
  • देवली — कजोड़ी देवी, भाजपा
  • डिग्गी — अरविंद, भाजपा
  • दूनी — अर्चना देवी, भाजपा
  • लांबाहरिसिंह — सोनियाकुमारी स्वर्णकार, भाजपा
  • मालपुरा — जिनेंद्रकुमार जैन, भाजपा
  • निवाई — नरेंद्रकुमार शर्मा, भाजपा
  • पीपलू — रमेश, भाजपा
  • टोडारायसिंह — संत कुमार, भाजपा
  • उनियारा — नरेशकुमार गुर्जर, कांग्रेस

निवाई में कांग्रेस 19 और भाजपा 18 पार्षदों के साथ दूसरे स्थान पर थी, फिर भी अध्यक्ष पद भाजपा ने जीत लिया। यह भी चुनाव बाद समर्थन जुटाने में भाजपा की बढ़त को दर्शाता है।


भाजपा की सबसे बड़ी सफलता — खंडित जनादेश को सत्ता में बदलना

अजमेर संभाग के परिणाम का पहला चरण भाजपा को पार्षद सीटों में बढ़त देने वाला था। दूसरा चरण—निकाय प्रमुखों का चुनाव—उसके चुनाव प्रबंधन की सफलता साबित हुआ।
अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर, डीडवाना, कुचामन सिटी और नागौर जैसे कई निकायों में भाजपा स्पष्ट बहुमत में नहीं थी। कहीं कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी तो कहीं निर्दलीय सबसे बड़ा समूह थे। इसके बावजूद भाजपा अपने उम्मीदवारों को महापौर अथवा सभापति बनवाने में सफल रही।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका अजमेर रहा। डीडवाना-कुचामन में पांच पद और टोंक नगर परिषद में सत्ता हासिल करना उसकी उपलब्धि है, लेकिन अजमेर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी महापौर नहीं बना पाना उसकी रणनीतिक कमजोरी बनकर सामने आया।

1. निर्दलीय जीते 321 सीटें, लेकिन सत्ता में सीधी हिस्सेदारी केवल एक पद

संभाग में 321 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। यह कुल घोषित सीटों का लगभग 19 प्रतिशत है। इसके बावजूद सीधे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में केवल रियांबड़ी नगरपालिका में अध्यक्ष पद जीता गया।
हालांकि सत्ता में उनकी वास्तविक भूमिका इससे कहीं बड़ी रही। अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर, पीसांगन, मकराना, नागौर और कई अन्य निकायों में उन्हीं के समर्थन से प्रमुख चुने गए। यानी निर्दलीय स्वयं अधिक पदों पर नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने यह तय किया कि सत्ता किस दल को मिलेगी।

2. अजमेर में 40–40 की बराबरी के बाद पर्ची से भाजपा के हेमंत सांखला बने उपमहापौर

अजमेर संभाग के नगर निगमों में उपमहापौर, नगर परिषदों में उपसभापति और नगरपालिकाओं में उपाध्यक्षों के चुनाव परिणामों ने कई निकायों में सत्ता-संतुलन को और स्पष्ट किया, जबकि कुछ स्थानों पर अध्यक्षीय चुनाव से अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिला।
अजमेर नगर निगम में उपमहापौर पद का मुकाबला सबसे रोमांचक रहा। भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को 40–40 वोट मिले। बराबर मत आने के बाद पर्ची निकाली गई, जिसमें भाजपा के हेमंत सांखला विजयी रहे। इस तरह भाजपा ने महापौर के बाद उपमहापौर पद भी अपने पास रख लिया। यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक दिन पहले महापौर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले थे। उपमहापौर चुनाव में भाजपा का आंकड़ा घटकर 40 और कांग्रेस का बढ़कर 40 हो गया। यानी महज 24 घंटे में तीन पार्षदों का मतदान रुख बदल गया।

3. भीलवाड़ा में भाजपा के राधेश्याम सोमानी निर्विरोध

भीलवाड़ा नगर निगम में महापौर जसवंत कंवर के बाद भाजपा के राधेश्याम सोमानी उपमहापौर पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए। इस तरह भीलवाड़ा निगम के दोनों प्रमुख पद भाजपा के खाते में गए। भाजपा के पास यहां 70 में से 45 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है।

4. किशनगढ़ में भाजपा के मनेंद्र सिंह खंगारोत उपसभापति

किशनगढ़ नगर परिषद में भाजपा के मनेंद्र सिंह खंगारोत उपसभापति निर्वाचित हुए। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र यादव को दस मतों से पराजित किया। इससे पहले भाजपा के राजकुमार सभापति बने थे। इस तरह किशनगढ़ नगर परिषद के सभापति और उपसभापति—दोनों पद भाजपा ने हासिल कर लिए।

5. ब्यावर में भाजपा के दीक्षांत हरचंदानी की जीत

ब्यावर नगर परिषद में भाजपा के दीक्षांत हरचंदानी उपसभापति निर्वाचित हुए। भाजपा पहले ही पुष्पा बल्दुआ को सभापति बनवा चुकी थी। स्पष्ट बहुमत से दूर रहने के बावजूद भाजपा ने ब्यावर में दोनों प्रमुख पद जीतकर निर्दलीयों और सहयोगी पार्षदों पर अपनी पकड़ साबित की।

6. टोंक में कांग्रेस की फरजाना सईद उपसभापति

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस की फरजाना सईद ने 36 वोट हासिल कर उपसभापति पद जीता। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी ओम पांडे को 13 मतों से पराजित किया। कांग्रेस के मयंक गोयल पहले ही सभापति चुने जा चुके हैं। इस प्रकार टोंक नगर परिषद में सभापति और उपसभापति—दोनों पद कांग्रेस के पास चले गए।


अजमेर में निर्दलीय पावरफुल

अजमेर में पर्ची से भाजपा का उपमहापौर जरूर बन गया, लेकिन बराबर मतदान ने यह साबित कर दिया कि निगम के भीतर सत्ता का गणित स्थायी नहीं है। आने वाले समय में समितियों के गठन, बजट, विकास प्रस्तावों और महत्वपूर्ण मतदान के दौरान निर्दलीय पार्षद एक बार फिर निर्णायक साबित हो सकते हैं।

राजनीतिक संदेश –

अजमेर संभाग के नगर निकाय चुनाव का परिणाम तीन स्पष्ट संदेश देता है।

  • पहला — छोटे शहरों और कस्बों में भाजपा का संगठनात्मक आधार मजबूत बना हुआ है। 740 पार्षद सीटें और 36 निकाय प्रमुख पद इसका प्रमाण हैं।
  • दूसरा — कांग्रेस ने अजमेर नगर निगम में 37 पार्षद जीतकर वापसी का संकेत जरूर दिया, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सत्ता हासिल नहीं कर सकी। टोंक, मकराना और डीडवाना-कुचामन के पांच निकायों में उसका प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा, लेकिन समग्र सत्ता-समीकरण में वह भाजपा से काफी पीछे रह गई।
  • तीसरा — निर्दलीय पार्षद इस चुनाव के वास्तविक किंगमेकर साबित हुए। उन्होंने स्वयं केवल एक निकाय प्रमुख पद जीता, लेकिन अनेक शहरों में उनके समर्थन ने भाजपा अथवा कांग्रेस का बोर्ड बनवाया।

पार्षद चुनाव में मतदाताओं ने कई जगह खंडित जनादेश दिया था। निकाय प्रमुखों के चुनाव ने उस खंडित तस्वीर को भाजपा के पक्ष में स्पष्ट सत्ता-समीकरण में बदल दिया। अजमेर संभाग का अंतिम निष्कर्ष यही है— जनता ने पार्षदों के स्तर पर विविध जनादेश दिया, लेकिन सत्ता के चुनाव में भाजपा का संगठन, रणनीति और निर्दलीयों को साथ लेने की क्षमता कांग्रेस पर भारी पड़ी।

फैक्ट फाइल

1,694 पार्षद सीटें — भाजपा 740, कांग्रेस 589, निर्दलीय 321, अन्य 44
52 निकाय प्रमुख — भाजपा 36, कांग्रेस 14, आरएलपी 1 और निर्दलीय 1

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